7 फरवरी से शुरू होगा Valentines Week, जानिए Rose Day से Valentine day तक सभी दिनों की सूची


Valentine Week: 14 फरवरी को भले ही वैलेंटाइन डे मनाया जाता है लेकिन उससे पहले पूरे हफ्ते तक रोजाना अलग-अलग दिन मनाये जाते हैं, जिसे वैलेंटाइन्स सप्ताह (Valentines Week) कहते हैं. इन 7 दिनों में लोग अपने प्यार का अलग-अलग तरह  से इजहार करते हैं.
Valentine Week
Valentine Week: 14 फरवरी को भले ही वैलेंटाइन डे मनाया जाता है लेकिन उससे पहले पूरे हफ्ते तक रोजाना अलग-अलग दिन मनाये जाते हैं, जिसे वैलेंटाइन्स सप्ताह (Valentines Week) कहते हैं. इन 7 दिनों में लोग अपने प्यार का अलग-अलग तरह  से इजहार करते हैं.


Valentine's  सप्ताह  पूरे सात दिनों तक मनाया जाने वाला सप्ताह है जिसे कपल्स बढ़े प्यार और उत्साह से मनाते हैं,एक दूसरे को उपहार देते हैं इसलिए ये सप्ताह प्यार करने वाले लोगों के लिए एक खास सप्ताह है |


"Valentine's  सप्ताह "प्यार ढाई अक्षरों से बना ऐसा शब्द है जिसके कारण लोग एक दूसरे की ओर आकर्षित होते हैं ,और यह तक कि कुछ तो साथ -साथ  जीने व् मरने की कसमें तक खा लेते हैं, प्यार के बंधन में बांधना मानव जीवन का स्वभाव प्राचीन कल से ही रहा है अगर हम अपने प्राचीन समय पर प्रकाश डालें तो एक नहीं सैकड़ों उदाहरण सामने आ जायेंगे|
आज की युवा पीढ़ी जिस 'वेलेंटाइन डे' को 'प्रेम दिवस' की संज्ञा देकर मना रही है, उन्हें वेलेंटाइन डे की हकीकत से रू--रू कराना बेहद जरूरी है। कहा जाता है कि पहले यूरोप में लोग बिना शादी के ही वो सबकुछ करने में स्वतंत्र थे, जो शादी के 7 फेरों के बाद करने की हमें समाज इजाजत देता है। एक बेहूदा कल्चर चल पड़ा था संपूर्ण यूरोपीय महाद्वीप में। लोग किसी के भी साथ चले जाते थे और मनमर्जी पर छोड़ भी देते थे।

यह सब इटली के संत वेलेंटाइन को रास नहीं आया और उन्होंने इसकी भर्त्सना कर एक अलग मार्ग अपनाया। संत वेलेंटाइन ने लोगों को शादी के बंधन में बांधकर दांपत्य जीवन के सच्चे अर्थों से परिचित करवाया। लेकिन ईसाई चर्च के पादरी होने के कारण लोगों का धर्म परिवर्तन भी खूब कराया। यह सब रोम के राजा क्लोडियस को नागवार गुजरा और उसने संत वेलेंटाइन को बुलाकर इसे अपनी यूरोपीय संस्कृति और परंपराओं के विरुद्ध बताकर इस पर तुरंत रोक लगाने को कहा, पर वेलेंटाइन नहीं माने और उन्हें राजा ने फांसी पर टांग दिया।
एक कुप्रथा के कलंक से यूरोप को मुक्त कराने के लिए संत वेलेंटाइन का ये कत्लेआम इतिहास में यादगार हो गया। बेशक, वेलेंटाइन ने एक बुरी परंपरा का दमन कर एक नई परंपरा का शुभारंभ करना चाहा, जो काबिले तारीफ है लेकिन जबरन धर्म परिवर्तन कराकर लोगों को ईसाई बनाने की उनकी ये गलती कभी माफ की जाने वाली है। यह सब यूरोप में हुआ है जिसका दूर-दूर तक भारत से कोई ताल्लुक ही नहीं है। फिर भी हमारे देश की नौजवान पीढ़ी इस सबको अपने बाप-दादाओं की बनाई परंपरा मानकर वेलेंटाइन डे मनाते ही जा रही है। हमारी युवा पीढ़ी आज अंधी होकर इन सब चीजों में अपना धन बर्बाद कर रही है।
अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण-उत्तर कोरिया, चीन जैसे कई देशों को वेलेंटाइन डे के नाम पर अपनी वस्तुओं को बेचने के लिए भारत जैसा देश एक सर्वश्रेष्ठ बाजार के रूप में नजर आता है और यहां के लोग उनको अपने 'सबसे बड़े ग्राहक' दिखते हैं। ग्रीटिंग कार्ड, टेडी बियर, चॉकलेट, तरह-तरह के गुलाब, गिफ्ट्स इत्यादि वस्तुओं को बेचकर विदेशी कंपनियां भारी मात्रा में मुनाफा कमाती हैं। इन सबसे अनजान रहकर युवा अपनी प्रेमिका के लिए ये सारी चीजें मुंहमांगे दामों पर खरीदता है। यदि ये सारी चीजें नहीं खरीदें तो आपने वेलेंटाइन डे भी नहीं मनाया, कंपनियां यह साफतौर पर कहती हैं।
अब सवाल यह उठता है कि क्या वेलेंटाइन डे मनाने के लिए ये सब संसाधन होने जरूरी हैं, जो विदेशी कंपनियां मुनाफे की आड़ में हमें मूर्ख बनाकर बेचती हैं। क्या इनके बगैर वेलेंटाइन डे मनाया तो संत वेलेंटाइन नाराज हो जाएंगे? और सबसे जरूरी बात यह है कि क्या हमें प्रेम और उसका अर्थ यूरोप जैसे पाश्चात्य देशों से ही सीखना पड़ेगा? जो आज तक भोगवाद की बीमारी से ग्रस्त है। जहां प्यार की आड़ में छल, कपट और फरेब सब चलता है जबकि हमारी भारतीय संस्कृति का आधार प्रेम है और हमारे जीवन की शुरुआत ही प्रेम से होती है।

हमारी संस्कृति प्रेम के मार्ग पर चलकर ही फलीभूत हुई है। जिस देश में सिर्फ सजीव ही नहीं, निर्जीव चीजों में भी प्रेम का भाव देखा जाता हो और जिस देश के लोग गुड़ से भी ज्यादा मधुर हों और जिस सरजमीं पर प्रेममूर्ति 16 हजार रानियों के दिलों के राजा श्रीकृष्ण ने अवतरित होकर प्रेम के प्रतिमान गढ़े हों, जहां की माटी के कण-कण में प्रेम की सुगंध शरीर में रक्त की तरह घुली-मिली हो, क्या उस देश के लोगों को प्रेम का ढाई अक्षर किसी यूरोप या उस जैसे किसी अन्य देश से सीखने की जरूरत है? वेलेंटाइन डे जैसे दिन केवल शारीरिक संबंधों तक ही सीमित है। जिनके अंत में हताशा और दु: ही छिपा हुआ है। ये सारे ढकोसले तो चमड़े के पुजारियों की देन है।
आज जरूरत है कि इस वेलेंटाइन डे की बीमारी से पीड़ित हुए युवाओं को प्रेम के सच्चे अर्थों और असल मायनों से परिचित कराते हुए इस बला का भूत उनके सिर से अतिशीघ्र उतारें। और प्रेम का इजहार करना ही है तो भारतीय रीति-रिवाजों के अनुरूप करें और उपहार देने इतने ही जरूरी हैं, तो भारतीय कंपनियों की निर्मित वस्तुएं ही भेंट करें ताकि देश का धन देश में ही रहे।

यह था वैलेंटाइन डे का प्राचीन कल का इतिहास जिसे मैंने विस्तार से समझाया है जिसमें मैंने आपको इसके प्राचीन इतिहास के बारे में बताया है परन्तु आज भी युवा इसे नए जोश और ताजगी के साथ प्रतिवर्ष मनाया जाता है रोज डे से शुरू होकर और वैलेंटाइन डे तक का ये सात दिनों का सफर विशेषकर युवाओं के लिए और भी ज्यादा मत्वपूर्ण है वैसे तो ये एक प्यार का दिन है इसे हम अपने दोस्तों,परिवार के सदस्यों व् रिश्तेदारों के साथ भी मना सकते हैं|

1.रोज डे, 7 फरवरी (February 7th, Rose Day) 2.प्रपोज डे, 8 फरवरी (Propose Day, February 8th 3.चॉकलेट डे, 9 फरवरी (Chocolate Day, February 9th) 4.टेडी डे, 10 फरवरी (Teddy Day, February 10th 5.प्रोमिस डे, 11 फरवरी (Promise Day, February 11th) 6.हग डे, 12 फरवरी (Hug Day, February 12th) 7.किस डे, 13 फरवरी (Kiss Day, February 13th) 8.वेलेंटाइन डे, 14 फरवरी (Valentine's Day, February 14th)

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